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Rajasthan: राजस्थान में नई बीमारी ! 6 महीने में मेलिओडोसिस के 5 रोगी मिले, जानें क्या हैं लक्षण

राजस्थान में नई बीमारी ने दस्तक दी है। पिछले छह महीने में पाली-जोधपुर में पांच लोग मेलिओडोसिस बीमारी से पीड़ित पाए गए हैं।
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Rajasthan News: राजस्थान में नई बीमारी ने दस्तक दी है, जिसका नाम मेलिओडोसिस बताया जा रहा है। यह एक खास बैक्टीरिया की वजह से होती है,(Rajasthan News) जो मिट्टी और पानी में पाया जाता है। पिछले छह महीने में राजस्थान में इस रोग से 5 लोग पीड़ित पाए गए हैं, इन सभी को जोधपुर के AIIMS अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इससे पहले इस बीमारी ने 100 साल पहले वियतनाम में कहर बरपाया था।

क्या है मेलिओडोसिस बीमारी ?

राजस्थान में पहली बार मेलिओडोसिस रोग की एंट्री हुई है। पिछले छह महीने में प्रदेश के पाली, जालोर और जोधपुर के 5 लोगों में इस बीमारी के संकेत मिले हैं। जिसके बाद सभी मरीजों को जोधपुर AIIMS में भर्ती करवाया गया। इससे पहले राजस्थान में कभी इस रोग के मरीज नहीं पाए गए। डॉक्टर्स के मुताबिक यह बीमारी पानी और मिट्टी में पाए जाने वाले एक बैक्टीरिया की वजह से होती है। समय पर जांच इलाज नहीं होने से खतरा बढ़ जाता है।

क्या हैं मेलिओडोसिस के लक्षण?

राजस्थान में दस्तक देने वाले इस नए रोग में पीड़ित को सबसे पहले बुखार आता है। इसके बाद सांस फूलने, मांसपेशियों में दर्द की समस्या होने लगती है। कई बार सिर दर्द, सीने में और पेट में दर्द की शिकायत भी होती है। चमड़ी पर अल्सर बन जाता है। वजन भी घटने लगता है। यह सभी सामान्य लक्षण इस बीमारी में नजर आते हैं। इसलिए सही समय पर जांच कर ली जाए तो जल्द इस रोग की रोकथाम की जा सकती है।

दिमाग-लिवर तक पहुंच जाता संक्रमण

डॉक्टर्स के मुताबिक इस रोग में संक्रमण दिमाग तक पहुंच सकता है। राजस्थान में इस रोग से पीड़ित मरीज में इस तरह के लक्षण देखने को मिले। एक रोगी के दिमाग में संक्रमण फैल गया। वहीं एक मरीज के लिवर में संक्रमण हो गया। जिसकी वजह से मरीज काफी गंभीर हालत में पहुंच गए। हालांकि इलाज के बाद मरीजों को काफी आराम मिला है और अब वह स्वस्थ्य हैं।

राजस्थान में पहली बार आया यह रोग!

डॉक्टर्स के मुताबिक राजस्थान में इससे पहले इस रोग की कभी एंट्री नहीं हुई। यह देश के धान की खेती वाले और पानी वाले इलाकों में देखने को मिलती थी। मगर पिछले छह महीने में राजस्थान में इस रोग के बीमार सामने आए हैं। जो काफी चिंताजनक है, हालांकि जो भी मरीज आए वह इलाज के बाद स्वस्थ्य हैं। मगर इस रोग की सही समय पर जांच कर पहचान और इलाज शुरू किया जाना काफी जरुरी है।

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