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सिर साटे रूंख रहे, तो भी सस्तौ जाण..." क्यों चर्चा में अहिंसा और प्रकृति प्रेमी बिश्नोई समाज? जानें पूरा इतिहास

Bishnoi Community: बिश्नोई समाज का (Bishnoi Community) नाम इन दिनों अपराध जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में, बिश्नोई गैंग ने कई हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामलों में अपनी पहचान बनाई है। इस गैंग का नाम पहली...
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Bishnoi Community: बिश्नोई समाज का (Bishnoi Community) नाम इन दिनों अपराध जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में, बिश्नोई गैंग ने कई हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामलों में अपनी पहचान बनाई है।

इस गैंग का नाम पहली बार तब सुर्खियों में आया जब पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या में कनाडा स्थित अपराधी गोल्डी बराड़ और जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई का नाम सामने आया। इसके बाद, अभिनेता सलमान ख़ान के घर के बाहर गोलीबारी की घटना और राजस्थान में करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या के मामले में भी बिश्नोई गैंग का नाम उभरकर आया है, जिससे इस गैंग की दहशत और बढ़ गई है।

बिश्नोई गैंग का आतंक: विडंबना या पहचान?

क्या यह विडंबना नहीं है कि एक समाज, जिसकी पहचान अहिंसा है, आज एक आपराधिक गैंग की हिंसा की वजह से चर्चा में है? बिश्नोई समाज, जो अपनी अटूट आस्था के लिए जाना जाता है, ने इतिहास में अपने नाम को स्वर्णाक्षरों में अंकित किया है।

इस समाज ने लॉरेंस अपराधी के गैंग को "बिश्नोई गैंग" कहे जाने पर चिंता जताई है। उनका स्पष्ट संदेश है—इस गैंग को लॉरेंस गैंग कहा जाना चाहिए, न कि बिश्नोई गैंग।

बिश्नोई कौन हैं? जानें उनके अनोखे इतिहास के बारे में!

बिश्नोई हिंदू हैं, जिनका एक अलग पंथ है। लेकिन, उन्होंने खुद को बिश्नोई क्यों कहा? इसके पीछे एक प्रेरणादायक इतिहास है, जो उनके पंथ के प्रवर्तक गुरु जंभेश्वर जी महाराज से जुड़ा हुआ है।

गुरु जंभेश्वर जी महाराज: एक संत, एक दार्शनिक

गुरु जंभेश्वर जी महाराज का जन्म 573 वर्ष पहले, 1451 में, राजस्थान के नागौर ज़िले के पीपासर गांव में हुआ था। वे धार्मिक प्रवृत्ति के थे और अपने मौन के लिए प्रसिद्ध थे।

महज 7 साल की उम्र में, उन्होंने एक चमत्कारी घटनाओं से सबको हैरान कर दिया, जिससे उन्हें 'गूंगा' नाम से भी जाना जाता था।

गुरु जंभेश्वर के 29 नियम: प्रकृति और समाज का संरक्षण

1485 में, गुरु जंभेश्वर ने एक अलग पंथ की शुरुआत की और 29 नियम बनाए। इनमें से आठ नियम प्रकृति और पशुओं के संरक्षण पर आधारित हैं, जबकि सात नियम सामाजिक व्यवहार के लिए हैं। गुरु जंभेश्वर ने अपने विचारों का प्रसार किया और 1536 में 85 वर्ष की आयु में उन्होंने निर्वाण प्राप्त किया।

बिश्नोई पंथ का तेज़ी से बढ़ता प्रभाव

गुरु जंभेश्वर के सरल लेकिन गहरे संदेशों ने लाखों लोगों को आकर्षित किया। विशेष रूप से, पश्चिमी राजस्थान में उनके अनुयायियों के लिए मंदिरों का निर्माण होने लगा। बिश्नोई समाज ने पेड़ों और पशुओं की रक्षा करने का संकल्प लिया, और इसके लिए प्राणों की भी आहुति देने से नहीं चूके।

खेजड़ी पेड़...पवित्रता और बलिदान की कहानी

बिश्नोई समाज खेजड़ी पेड़ को पवित्र मानता है। उनकी अनेकों कहानियाँ हैं, जिनमें से एक है 1730 की खेजड़ली घटना। इस घटना में, 363 बिश्नोई लोगों ने पेड़ों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी, जिसके बाद महाराजा अभय सिंह ने खेजड़ी पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी।

काला हिरण: बिश्नोई समाज का आदर्श

बिश्नोई लोग काले हिरणों को भी पूजनीय मानते हैं। उनके अनुसार, अगले जन्म में वे हिरण का रूप धारण करेंगे।  इसलिए, हिरणों के शिकार पर बिश्नोई समाज की कड़ी प्रतिक्रिया होती है, और इसी वजह से अभिनेता सलमान ख़ान को लॉरेंस बिश्नोई के निशाने पर आना पड़ा।

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