"मैंने अर्धनग्न शब्द नहीं बोला..." मदन दिलावर का यू-टर्न! अब बोले- बच्चों के सामने आदर्श के रूप में प्रस्तुत हों टीचर्स
Madan Dilawar Statement: राजस्थान के शिक्षामंत्री मदन दिलावर वर्तमान में अपने बयानों के चलते सुर्खियों में रहते हैं. बीते बुधवार को नीमकाथाना के नृसिंहपुरी में शिक्षा मंत्री ने राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक संस्कृत स्कूल के जीर्णोद्धार भवन का लोकार्पण के दौरान महिला टीचरों के कपड़ों को लेकर एक बयान दिया जिसके बाद बवाल छिड़ गया. विपक्षी दल कांग्रेस ने दिलावर पर जमकर हमला बोला और इस्तीफे की मांग की. वहीं मंत्री को बयान दिए 24 घंटे भी नहीं हुए कि उन्होंने यू-टर्न ले लिया है.
दरअसल दिलावर ने बुधवार को कहा था कि कई शिक्षिका अच्छे कपड़े नहीं पहन कर स्कूल जाती है और शरीर को दिखाकर चलती हैं. हालांकि अपने बयान पर सफाई देते हुए दिलावर ने गुरुवार को जोधपुर में कहा कि मैंने जो अर्धनग्न को परिभाषित किया था वो शब्द नहीं बोला. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया मेरे इस बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है. मैंने सिर्फ यह कहा था कि कम कपड़े पहनकर शिक्षक विद्यालय जाते हैं जिससे बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ता है.
'कुछ शिक्षिका अच्छे कपड़े नहीं पहनती'
दिलावर ने नीमकाथाना में कहा था कि स्कूलों में कई शिक्षिका अच्छे कपड़े नहीं पहन कर जाती, वे पूरे शरीर को दिखाकर चलती हैं जिससे बच्चों पर अच्छा प्रभाव नहीं पड़ता है. उन्होंने कहा कि उन शिक्षिका को सोचना चाहिए कि हम लोगों को किस तरीके के कपड़े पहनने चाहिए और कैसे रहना चाहिए. दिलावर ने ये भी कहा था कि कई टीचर्स स्कूल में गुटखा खाकर जाते हैं और स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों पर गलत प्रभाव पड़ता है.
'मेरे बयान को तोड़ा-मरोड़ा गया'
वहीं शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने गुरुवार को जोधपुर दौरे पर कहा कि मैंने जो अर्धनग्न को परिभाषित किया है, अर्धनग्न शब्द नहीं बोला. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया मेरे इस बयान को तोड़ मरोड़ के पेश कर रही है, मैंने सिर्फ यह कहा कि कम कपड़े पहनकर शिक्षक विद्यालय जाते हैं जिससे बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ता है. वहीं उन्होंने इस बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि बच्चे विद्यालय में 7 से 8 घंटे रहते हैं इस दौरान शिक्षकों को बच्चों के सामने आदर्श के रूप में प्रस्तुत करना पड़ेगा ताकि वह संस्कार ले सकें.
दिलावर ने कहा कि अगर कोई शिक्षक लेट आता है और कोई जब उनसे पूछता है कि कितने बजे आए हैं तो कहते हैं कि सही समय आए हैं लेकिन इससे बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ता है औऱ बच्चे यह समझते हैं कि झूठ बोलना अच्छा है इसलिए बच्चे झूठ बोलना भी सीख जाते हैं जो कि गलत है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि विद्यालय में अच्छे कपड़े पहन कर जाएं जिससे कि बच्चों पर दुष्प्रभाव नहीं पड़े.