BAP बनेगी राजस्थान की तीसरी बड़ी राजनीतिक पार्टी! उपचुनाव के नतीजे देंगे बीएपी के भविष्य का संकेत
Bharat Adivasi Party Rajasthan: (मृदुल पुरोहित) | राजस्थान में विधानसभा की सात सीटों के लिए मतदान हो चुका है और मतगणना 23 नवम्बर को होगी। उपचुनाव के परिणाम राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के लिए साख का विषय है, वहीं कांग्रेस के लिए भी अपनी सीटों को दोबारा जीतने की चुनौती है। इसके बीच दक्षिणी राजस्थान में उभर कर आई भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के लिए उपचुनाव के परिणाम उसके भविष्य के भी संकेत देंगे।
वर्ष 2018 में भारतीय ट्राइबल पार्टी से डूंगरपुर जिले की चौरासी और सागवाड़ा सीट से चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद इस पार्टी में अगला चुनाव आते-आते टूट हो गई। अक्टूबर 2023 में भारत आदिवासी पार्टी का गठन हुआ। इस पार्टी ने चौरासी, आसपुर और धरियावद सीट पर धमाकेदार जीत हासिल की। वहीं बांसवाड़ा जिले में भी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। गत अप्रेल में हुए लोकसभा चुनाव में बीएपी ने आदिवासी बहुल बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा सीट पर भी कब्जा जमा लिया। पार्टी के संस्थापकों में सम्मिलित चौरासी विधायक राजकुमार रोत सांसद बने।
बागीदौरा उपचुनाव में मिली थी जीत
बांसवाड़ा जिले की बागीदौरा सीट से 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता महेंद्रजीतसिंह मालवीया चुनाव जीते। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने कांग्रेस के हाथ को छोडक़र भाजपा का दामन थाम लिया। इस कारण उन्हें विधायक पद से त्यागपत्र देना पड़ा। लोकसभा चुनाव में मालवीया भाजपा से लड़े, किंतु राजकुमार को मात नहीं दे पाए। बीएपी की चली लहर में बागीदौरा सीट पर उपचुनाव हुए, जिसमें पार्टी के जयकृष्ण पटेल ने मालवीया के करीबी सुभाष तम्बोलिया को हराया। किसी भी उपचुनाव में बीएपी की यह पहली जीत रही।
अब दो सीटों पर आजमा रहे भाग्य
राजकुमार रोत के सांसद बनने से चौरासी और विधायक अमृतलाल के निधन के कारण सलूम्बर सीट पर विधानसभा उपचुनाव हो रहे हैं। 2023 में चौरासी में जहां बीएपी ने जीत हासिल की थी, वहीं सलूम्बर में वह तीसरे स्थान पर रही थी। इस बार के चुनाव में चौरासी में मतदान प्रतिशत करीब 7 प्रतिशत गिरा है। वहीं सलूम्बर में भाजपा के दिवंगत विधायक की पत्नी के प्रति सहानुभूति है। ऐसे में 23 नवम्बर को होने वाली मतगणना और परिणाम के बाद एक बात साफ हो जाएगी कि दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी बहुल बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ सहित अन्य सीटों पर बीएपी का भविष्य क्या और कैसा होगा ?
...तो भाजपा-कांग्रेस में चिंता!
राजनीतिक जानकारों का भी मानना है कि आदिवासी क्षेत्र की इन दो सीटों पर हुए उपचुनाव बीएपी के भविष्य का संकेत देंगे। यदि बीएपी दोनों सीट पर जीत दर्ज करती है तो यह भाजपा और कांग्रेस को चिंता में डालने के लिए पर्याप्त होगी। वहीं पिछले दो चुनाव से अपने कब्जे में रखने वाले सांसद राजकुमार के लिए चौरासी सीट को बचाने की चुनौती भी है। वैसे इस सीट को पुन: पाने के लिए भाजपा ने पूरा जोर लगाया है। मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष सहित बड़े नेता भी प्रचार में आए। संघ ने भी गांव-गांव में अपनी पूरी ताकत लगाई है। अब मतदाताओं ने किस प्रत्याशी के भाग्य में राजयोग लिखा है, उसका निर्णय 23 नवम्बर को हो जाएगा।
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