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Organ Transplant Case : निजी अस्पतालों में ऑर्गन ट्रांसप्लांट का मामला, बांग्लादेश हाई कमीशन पहुंची जयपुर पुलिस

11:53 AM May 02, 2024 IST | C Pachrangia

Organ Transplant Case : दिल्ली/जयपुर। सवाई मान सिंह अस्पताल से जारी हुई फर्जी एनओसी पर निजी अस्पतालों में किए गए ऑर्गन ट्रांसप्लांट (Organ Transplant Case) के मामले की जांच जारी है। इस मामले में जांच को लेकर जयपुर पुलिस बुधवार शाम दिल्ली पहुंची और बांग्लादेश हाई कमीशन से रिकॉर्ड मांगा है। पुलिस टीम यहां से पिछले कुछ दिनों में भारत इलाज के लिए आए बांग्लादेशियों की जानकारी लेकर ट्रांसप्लांट कराने वाले बांग्लादेशियों तक पहुंचने की प्लानिंग कर रही है।

 

 

रिकॉर्ड का होगा मिलान

 

 

 

पूरे मामले की मॉनिटरिंग एडिशनल कमिश्नर कैलाश बिश्नोई कर रहे हैं। पुलिस अब हाई कमीशन से मिलने वाले रिकॉर्ड और अस्पतालों से जब्त किए गए रिकॉर्ड का मिलान करेगी। इसके बाद दोनों जगह के रिकॉर्ड के आधार पर ट्रांसप्लांट करने वाले मरीजों तक पहुंचकर ऑर्गन ट्रांसप्लांट (Organ Transplant Case) करने वाले डॉक्टर और हॉस्पिटल प्रबंधन के कार्मिकों से पूछताछ की जाएगी और दोषियों की गिरफ्तारी होगी।

 

 

फोर्टिस अस्पताल से फाइलें जब्त

 

 

इधर प्रॉडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किए गए मामले से जुड़े फोर्टिस अस्पताल के ऑर्गन को-ऑर्डिनेटर विनोद सिंह व गिरिराज से पूछताछ जारी हैं। इन दोनों आरोपियों को लेकर पुलिस फोर्टिस अस्पताल पहुंची। दोनों ने पुलिस को काफी महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उनके बताए अनुसार अस्पताल से कुछ फाइल्स भी जब्त की गई है। इन फाइलों की संख्या एक दर्जन के आसपास है।

 

 

 

एसीबी भी जुटी जांच में

 

 

पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए इस मामले में एसीबी भी जांच में जुटी हुई है। बांग्लादेशियों के अलावा नेपाल और कंबोडिया के डोनर को भी पुलिस ट्रेक कर रही है। इन मामलों में फोर्टीज अस्पताल और ईएचसीसी अस्पताल के खिलाफ दर्ज केस की जांच एसपी गोपाल ढाका कर रहे हैं।

 

 

आखिर कब आएगी कमेटी की रिपोर्ट ?

 

 

इधर इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने जांच के लिए चिकित्सा शिक्षा आयुक्त इकबाल खान की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय उच्च स्तरीय टीम बनाई थी। 15 दिनों में ही इस टीम को रिपोर्ट देनी थी, लेकिन जांच में देरी हो गई। इसका कारण अस्पतालों का रिकॉर्ड एसीबी के पास होना था। अब जल्द ही इसकी जांच रिपोर्ट आने की उम्मीद है जिसके बाद और स्पष्ट हो जाएगा कि किस- किस अस्पताल की भूमिका संदिग्ध रही है।

 

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