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Jaisalmer: जैसलमेर की तेंमड़ेराय माता...चुल्लू में भर लिया था समुद्र, गांव को राक्षस के आतंक से कराया मुक्त !

Navratri 2024 Jaisalmer:  जैसलमेर। देवी मां की आराधना का पर्व नवरात्रि शुरू हो चुका है। (Navratri 2024 Jaisalmer) राजस्थान के जैसलमेर के तेंमड़ेराय माता मंदिर में भी नवरात्रि में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। स्थानीय लोग कहते हैं कि मां...
04:57 PM Oct 04, 2024 IST | Rajasthan First

Navratri 2024 Jaisalmer:  जैसलमेर। देवी मां की आराधना का पर्व नवरात्रि शुरू हो चुका है। (Navratri 2024 Jaisalmer) राजस्थान के जैसलमेर के तेंमड़ेराय माता मंदिर में भी नवरात्रि में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। स्थानीय लोग कहते हैं कि मां ने कई सालों पहले गांव को राक्षस के आतंक से मुक्त कराया था। तब से स्थानीय लोग देवी मां की पूजा- सेवा करते आ रहे हैं। इसके अलावा देवी मां के कुछ और चमत्कारों की कथाएं भी क्षेत्र में प्रचलित हैं।

राक्षस के आतंक से गांव को बचाया !

तेंबडे माता का मंदिर जैसलमेर के तेंबडे गांव में पर्वत पर एक गुफा में बना हुआ है। जिसमें देवी मां की मूर्तियां स्थापित हैं। नवरात्रि में आसपास के काफी लोग देवी मां के दर्शन कर खुशहाली की कामना करने आते हैं। इस बार भी यहां नवरात्रि के पहले दिन से ही भक्तों का आना शुरू हो चुका है। स्थानीय लोगों के बीच देवी मां के चमत्कार को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सालों पहले गांव में एक राक्षस आतंक मचाने लगा था। तब देवी मां ने उसका वध कर गांव की रक्षा की थी, तब से ग्रामीण मां देवी की पूजा करते आ रहे हैं।

देवी मां ने चुल्लू में भर लिया था समुद्र !

तेंबड़ेराय माता को लेकर स्थानीय लोग कई कथाएं सुनाते हैं। जिनमें राक्षस के वध के साथ देवी मां के अन्य चमत्कारों का जिक्र मिलता है। ऐसी ही एक कथा के अनुसार एक बार देवी मां को हाकड़ा समुद्र पार कर कहीं जाना पड़ा। इससे पहले देवी मां ने किनारे पर पहुंचकर समुद्र से रास्ता देने की प्रार्थना की। मगर समुद्र ने रास्ता नहीं दिया तो देवी मां ने समुद्र को अपने हाथ के चुल्लू में भर लिया था। एक कथा के मुताबिक देवी मां ने एक बार नाग का स्वरुप भी धारण किया था, जिसकी वजह से इनका नागणेची भी कहा जाता है। गांव के लोग आज भी देवी मां के प्रति गहरी आस्था रखते हैं। खासतौर से नवरात्रि में यहां आज भी काफी भक्त उमड़ते हैं।

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