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Kota: जनाब..हारना मना है, यह कोटा है चम्बल का पानी, वीरों की धरा ! कोचिंग स्टूडेंट्स को मनोज मुंतशिर की सलाह

प्रख्यात मोटिवेशन स्पीकर मनोज मुंतशिर ने कोटा दशहरा मेले में कोचिंग स्टूडेंट्स को मोटिवेट किया। उन्होंने कहा कि मुंबई से ज्यादा कोटा की आंखें सपने देखती हैं।
12:53 PM Oct 23, 2024 IST | Arjun Arvind

Manoj Muntashir Kota: कोटा। प्रख्यात लेखक, गीतकार और मोटिवेशनल स्पीकर मनोज मुंतशिर कोटा पहुंचे। उन्होंने नगर निगम की ओर से राष्ट्रीय दशहरा मेले में कोचिंग स्टूडेंट्स के लिए मोटिवेशनल स्पीच दी। इस दौरान मनोज मुंतशिर (Manoj Muntashir Kota) ने स्टूडेंट्स को सलाह दी कि कोटा आने वाले बच्चों को पहले ही यह पता होना चाहिए कि जनाब..यहां हारना मना है, यह कोटा है चम्बल का पानी, वीरों की धरा।

'मुंबई से ज्यादा कोटा की आंखें सपने देखती हैं'

मोटिवेशनल स्पीकर मनोज मुंतशिर ने कहा कि मुंबई से ज्यादा कोटा की आंखें सपने देखती हैं। कोटा में कई स्टूडेंट डॉक्टर- इंजीनियर के सपने संजोकर आते हैं। मगर इनमें से कुछ राह भटक जाते हैं और फिर अपने मां-बाप की आंखों में आंसू छोड जाते हैं। मनोज मुंतशिर ने कहा कि कोई भी असलफता आपके सपनों और जीवन से बड़ी नहीं हो सकती। हारा वही जो लड़ा नहीं और वह लड़ाई ही क्या जिसे जीते बिना छोड़ दिया जाए। सिर्फ और सिर्फ एक ही चीज याद रखो कि हमें सफल होकर ही रहना है।

'धरती पर इंसान की तरह रहना राम ही सिखा सकते हैं'

मनोज मुंतशिर ने कहा कि वह शिक्षा अधूरी है, जिसमें संस्कार ना हों और संस्कारों के बिना सफलता अधूरी है। आज हम मंगल पर जीवन खोज रहे हैं, जबकि भगवान राम ने आज से 7500 साल पहले जीवन में मंगल खोज लिया था। अब दुनिया बहुत आगे निकल चुकी है। मगर इंसान की तरह धरती पर रहना केवल राम सिखा सकते हैं। रामायण से बड़ा कोई फार्मूला नहीं और राम से बड़ा कोई नायक नहीं। उन्होंने फिल्म इमरजेंसी को लेकर भी बच्चों से बात की। बच्चों को महिलाओं का सम्मान करने की सीख दी।

'19वीं सदी ब्रिटेन, 20वीं अमेरिका...21वीं सदी हमारी है'

मनोज मुंतशिर शुक्ला ने कहा कि अंग्रेज भारत को सपेरों का देश कहते थे। आज भारत का सबमरीन देख थर्राते हैं। चंद्रमा पर शिव शक्ति पॉइंट देख दांतों तले उंगली दबाते हैं। विंस्टन चर्चिल कहते थे भूख से मर जाएगा यह देश। वक्त ने जवाब दिया आज स्पेस से लेकर खेल के मैदान तक भारत का नाम है। दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन ड्राइव चलाते हैं।19वीं सदी ब्रिटेन की, 20वीं सदी अमेरिका की थी तो 21वीं सदी तुम्हारी और हमारी है। 75 साल पहले नहीं रुके जब रेंग रहे थे तो अब तो पंख उठा लिए हैं।

'जिसे हिंदुस्तानियों ने खदेड़ा...वो कैसा सिकंदर'

मनोज मुंतशिर ने कोचिंग छात्रों को कहा कि दुनिया कहती है- जो जीता वही सिकंदर। मगर जिसे हिंदुस्तानियों ने खदेड़ दिया हो वो कैसा सिकंदर। इसलिए वक्त आ गया है कि कोटा के बच्चे अपने असली नायकों को प्रतिस्थापित करें। इसके लिए खुद स्थापित होना जरुरी है। हमारे यहां तो भगवान भी सालों जंगलों में भटके, मगर मर्यादा नहीं छोड़ीं। राजा भी सालों घास की रोटियां खाते रहे, मगर हार मंजूर नहीं की। तो फिर आपको भी जीतना होगा। खुद से, अपने सपनों से, इम्तहानों से और हर अवसाद से।

भाषा सफलता में अवरोध नहीं बनती- मनोज मुंतशिर

मनोज मुंतशिर ने बच्चों को खुद के संघर्ष के किस्से सुनाए। भगवान राम के जीवन से प्रेरणा लेने की सीख दी। वहीं हिंदी की ताकत भी समझाई। उन्होंने कहा कि गांव कस्बों के बच्चों में बड़े शहरों में आते ही भाषा को लेकर हीनभावना आ जाती है। उन्हें लगता है कि अंग्रेजी नहीं आती तो कुछ भी नहीं आता। मगर, सच यह है कि भाषा कभी भी सफलता के आड़े नहीं आ सकती। मुझे भी अंग्रेजी नहीं आती थी, इसलिए छह साल संघर्ष किया।मगर जब कौन बनेगा करोड़पति लिखा और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने लोगों को हिंदी में देवियो और सज्जनों कहकर संबोधित किया, तब पहचान मिली।

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