गुलदाउदी: वो फूल जिसे जापान के राजा ने अपने ताज में पहना, 60 दिनों तक रहती है खुशबू....अब जयपुर को महका रहा
Guldaudi Flower Exhibition: प्रकृति के हर कोने में छुपा सौंदर्य हमें यह एहसास कराता है कि जीवन में हर चीज की अपनी अनूठी खासियत होती है। कुछ फूल अपनी महक से मन मोह लेते हैं, तो कुछ अपनी सुंदरता से। (Guldaudi Flower Exhibition)ऐसा ही एक अद्भुत फूल है गुलदाउदी...जो अपनी खुशबू के बजाय अपने रंगों और आकार से हर किसी को आकर्षित करता है।
गुलदाउदी का इतिहास बेहद दिलचस्प है। चीन से निकलकर इसने पूरे विश्व में अपनी पहचान बनाई। जापान के सम्राट ने इसे इतना पसंद किया कि इसे अपने क्राउन का हिस्सा बना लिया। भारत में भी यह फूल अपनी खास जगह बनाए हुए है। राजस्थान विश्वविद्यालय में हर साल गुलदाउदी की एग्जिबिशन इसकी लोकप्रियता का प्रमाण है।
इस फूल की एक और खासियत है कि यह 15 से 60 दिनों तक खिलकर अपनी सुंदरता बिखेरता है। सूखने के बाद भी इसका महत्व खत्म नहीं होता, बल्कि इससे हर्बल चाय और औषधियां तैयार की जाती हैं। गुलदाउदी केवल एक फूल नहीं, बल्कि प्रकृति की विविधता और उपयोगिता का जीता-जागता उदाहरण है।
एक अद्भुत फ्लावर
गुलदाउदी, सूर्यमुखी कुल का पौधा, जिसे कॉम्पोजिटी फ्लावर कहा जाता है, एक ऐसा फूल है जिसमें दो अलग-अलग प्रकार के फूल मिलकर इसे बनाते हैं। यह फूल अपने रंग और आकार के कारण विशेष रूप से आकर्षक होता है। गुलदाउदी को समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, और इसे जापान में सम्राट के क्राउन में सजाया जाता था।
गुलदाउदी के आठ ग्रुप और उनकी विविधताए
प्रोफेसर रामावतार शर्मा के अनुसार, पूरी दुनिया में गुलदाउदी के आठ ग्रुप होते हैं, जिनमें से छह भारत में पाए जाते हैं। राजस्थान विश्वविद्यालय में गुलदाउदी के पांच प्रमुख ग्रुप की प्रदर्शनी आयोजित की जाती है। गुलदाउदी के प्रमुख रंग पीला, लाल और सफेद होते हैं, लेकिन इसके क्लाइमेट के हिसाब से कई मिक्स रंग भी विकसित होते हैं। इसमें विभिन्न आकारों और जीवनकाल वाले फूल होते हैं, जिनमें करीब 60 किस्में होती हैं।
60 दिन तक खिला रहने वाला फूल
गुलदाउदी का जीवनकाल 15 से 60 दिन तक होता है। यह एक बिना खुशबू वाला फूल है, जो रंगों और आकारों के कारण लोगों को आकर्षित करता है। गुलदाउदी की विविधता में बटन, रेगुलर, इनरेगुलर, स्पून, स्पाइडर और पोमपोम जैसी कई किस्में शामिल हैं। इनमें से बटन सबसे छोटी और इनरेगुलर सबसे बड़ी किस्म होती है।
हर्बल टी और मेडिसिन में उपयोग
गुलदाउदी का उपयोग केवल सजावट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उपयोग हर्बल टी और मेडिसिन में भी किया जाता है। इसके फूलों के सूखने के बाद हल्की खुशबू आती है, और यह चाय के रूप में स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।
राजस्थान विश्वविद्यालय में गुलदाउदी की एग्जिबिशन
राजस्थान विश्वविद्यालय में गुलदाउदी की एक विशेष एग्जिबिशन आयोजित की जाती है, जहां इस फूल की विभिन्न किस्मों को प्रदर्शित किया जाता है। गार्डन इंचार्ज डॉ. योगेश जोशी के अनुसार, गुलदाउदी को कुछ लोग "मम्स" कहकर भी पुकारते हैं। यह फूल एशियाई ओरिजिन का है, और चीन से यह पूरी दुनिया में फैला है। गुलदाउदी को नर्सरी से घरों तक पहुंचने में 4 से 6 महीने का समय लगता है, और इसके सैंपलिंग को तैयार करने में 2 से 3 महीने का समय लगता है।
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