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पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा का अब शिवसेना से भी हुआ मोहभंग! झुंझुनूं से AIMIM के टिकट पर लड़ सकते हैं उपचुनाव

Will Rajendra Gudha join the new party? जयपुर। पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा का शिवसेना (शिंदे) से भी शायद मोहभंग हो गया है। झुंझुनूं में उप चुनाव की सुगबुगाहट से पहले राजेंद्र गुढ़ा ने कुछ इसी तरह के संकेत दिए हैं।...
09:41 PM Jun 17, 2024 IST | Vivek Chaturvedi

Will Rajendra Gudha join the new party? जयपुर। पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा का शिवसेना (शिंदे) से भी शायद मोहभंग हो गया है। झुंझुनूं में उप चुनाव की सुगबुगाहट से पहले राजेंद्र गुढ़ा ने कुछ इसी तरह के संकेत दिए हैं। गुढ़ा ने कहा है कि वो अगला चुनाव शिवसेना से नहीं लड़ेंगे।

बयानों से सुर्खियों में रहते हैं राजेंद्र गुढ़ा

विवादित बयानों की वजह से सुर्खियों में रहने वाले पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा एक बार फिर पाला बदलने जा रहे हैं। विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले ही शिवसेना (शिंदे) ज्वाइन करने वाले गुढ़ा नई पार्टी की तलाश में हैं। साल भर में ही उनका शिवसेना से शायद मोहभंग हो गया है। उन्होंने ऐलान किया है कि वे अगला चुनाव शिवसेना शिंदे से नहीं लड़ेंगे।

उप चुनाव से पहले गुढ़ा ने की औवेसी की तारीफ

शिवसेना शिंदे के प्रदेश संयोजक राजेंद्र गुढ़ा ईद के मौके पर झुंझुनूं में ईदगाह पर पहुंचे। उन्होंने मुस्लिम भाइयों को मुबारकबाद देने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि वे अगला चुनाव लड़ेंगे, लेकिन शिवसेना के चुनाव चिह्न पर नहीं। इसके साथ ही गुढ़ा ने कहा कि एआइएमआइएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी उनके दोस्त हैं। वह उनका सम्मान करते हैं और अक्सर वे आपस में बात भी करते हैं। गुढ़ा के इस बयान के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि वह एक बार फिर पाला बदलने जा रहे हैं।

बार- बार पार्टी बदलते रहे हैं पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा

राजेंद्र गुढ़ा 2008 में बसपा के चुनाव चिह्न पर पहली बार विधायक बने थे। कुछ समय बाद अशोक गहलोत की सरकार को समर्थन करने के लिए सभी बसपा विधायकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए। 2013 में वह कांग्रेस के टिकट पर उदयपुरवाटी से चुनाव मैदान में उतरे। मगर हार गए। 2015 में उन्होंने फिर बसपा ज्वाइन कर ली और 2018 में बसपा के टिकट पर विधायक बने। मगर जीतने के बाद गहलोत सरकार को समर्थन देकर कांग्रेस में शामिल हो गए।

लाल डायरी से अपनी ही सरकार को घेरा

राजेंद्र गुढ़ा विवादित बयानों के साथ अपनी सरकार को घेरने के लिए भी जाने जाते हैं। जब गहलोत सरकार में मंत्री बनाने में देरी होने पर उन्होंने कहा था कि बुढ़ापे में शादी का क्या मतलब? उनका यह बयान काफी सुर्खियों में रहा। गहलोत के बाद गुढ़ा कुछ समय पायलट के समर्थन में भी रहे। इस दौरान उन्होंने पूर्व सीएम गहलोत को जमकर घेरा। इसके अलावा राजेंद्र गुढ़ा ने लाल डायरी से भी गहलोत सरकार की नाक में काफी दम किया। बाद में गुढ़ा शिवसेना (शिंदे) में शामिल हो गए। हालांकि इस बार चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिल पाई।

झुंझुनूं से उपचुनाव की तैयारी में गुढ़ा !

अब राजेंद्र गुढ़ा के बयान से संकेत मिल रहे हैं कि वह झुंझुनूं सीट पर संभावित उपचुनाव की तैयारी में हैं। झुंझुनूं से कांग्रेस विधायक बृजेंद्र ओला सांसद बन गए हैं। ऐसे में इस सीट पर उप चुनाव होना है। इस सीट पर मुस्लिम वोटर्स की काफी संख्या है, ऐसे में राजेंद्र गुढ़ा का औवेसी की तारीफ करना सामान्य नहीं माना जा रहा।

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