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Diwali 2024: धनतेरस पर धनकुबेर और धन्वंतरी की पूजा से हुआ दीपोत्सव का आगाज, जानें लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त

दीपोत्सव महापर्व आज धनतेरस से शुरु हो चुका है। इस बार दीपावली 31 अक्टूबर के साथ 1 नवंबर को मनाई जाएगी। जानें शुभ मुहूर्त
12:38 PM Oct 29, 2024 IST | Rajasthan First

Diwali 2024: धन की देवी माता लक्ष्मी की आराधना का पर्व दीपोत्सव आज से शुरू हो गया है। आज धनतेरस पर शुभ मूहूर्त में धन्वन्तरी के साथ धनकुबेर की पूजा की जा रही है। खास बात यह है कि (Diwali 2024) इस बार दीपोत्सव पांच दिन की जगह छह दिन का मनाया जाएगा। क्योंकि दीपावली 31 अक्टूबर और 1 नवंबर दो दिन मनाई जाएगी। 

आज धनतेरस पर शाम 7 बजे तक सिद्ध योग

दीपोत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। धनतेरस पर आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि का पूजन होता है। भगवान धन्वंतरी आज के ही दिन समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। तभी से आज के दिन उनकी पूजा का विधान है। इसके अलावा आज के दिन सोना-चांदी, संपत्ति खरीदना भी काफी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि आज के दिन खरीदी गई संपत्ति शुभकारी होती है और इसमें बढ़ोतरी होती रहती  है। इस बार धनतेरस पर सिद्ध योग पूरे दिन रहेगा। शाम 7 बजे तक सिद्ध योग में संपत्ति, सोना-चांदी, बर्तन आदि खरीदना शुभ बताया जा रहा है।

कल दोपहर 3.53 तक रुप चतुर्दशी, यम की पूजा

रुप चतुर्दशी कल 31 अक्टूबर को मनाई जाएगी, इस चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। इस दिन यमराज की पूजा का विधान है। इस बार चतुर्दशी तिथि 31 अक्टूबर को दोपहर 3.53 तक है। इस मुहूर्त में घर के कोनों में दीपक लगाने चाहिए, मान्यता है कि इससे यमराज प्रसन्न होते हैं। इसके साथ ही यह दिन महिलाओं के लिए भी समर्पित है। इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर दीपोत्सव के लिए तैयार होती हैं।

दीपावली इस बार दो दिन मनाई जा रही

इस बार दीपावली 31 अक्टूबर और एक नवंबर दो दिन मनाई जा रही है। अलग-अलग मतानुसार लोग दोनों ही दिन शुभ मुहूर्त में धन की देवी मां लक्ष्मी की आराधना कर सकेंगे। दीपावली पर सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है। 31 अक्टूबर को शाम 5. 36 बजे से रात 8.11 बजे तक लक्ष्मी पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। वहीं एक नवंबर को भी शाम 6.17 बजे तक माता लक्ष्मी की पूजा की जाएगी।

2 नवंबर को गोवर्धन पूजा, 3 को भाई दूज

गोवर्धन पर्वत की पूजा का त्योहार 2 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन गोवर्धन महाराज की विशेष पूजा अर्चना की जाएगी। मान्यता है कि आज ही के दिन श्रीकृष्ण भगवान ने गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठाकर इंद्र का अभिमान दूरकिया था। तभी से गोवर्धन पूजा का उत्सव मनाया जाता रहा है। इसके साथ ही उन्हें कढ़ी-चावल, बाजरे सहित अन्य खाद्यान्नों से बने अन्नकूट का प्रसाद लगाया जाएगा। वहीं 3 नवंबर को भाईदूज मनाया जाएगा। इस मौके दिनभर शुभ मुहूर्त है, जिसमें बहनें भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु और समृद्धि की कामना करेंगी।

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