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Rajasthan By-Election 2024:निर्दलीय उम्मीदवारों की ताकत से कांप रही कांग्रेस और बीजेपी! क्या होगा परिणाम?

Rajasthan By-Election 2024: राजस्थान में विधानसभा उपचुनाव के लिए चुनावी शोर अब थम चुका है, और अब 13 नवंबर को सात सीटों पर वोटिंग होगी। इस चुनावी घमासान में बीजेपी और कांग्रेस दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। (Rajasthan...
07:28 PM Nov 11, 2024 IST | Rajesh Singhal

Rajasthan By-Election 2024: राजस्थान में विधानसभा उपचुनाव के लिए चुनावी शोर अब थम चुका है, और अब 13 नवंबर को सात सीटों पर वोटिंग होगी। इस चुनावी घमासान में बीजेपी और कांग्रेस दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। (Rajasthan By-Election 2024) कांग्रेस अपनी सीटों को बचाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक चुकी है, वहीं बीजेपी प्रदेश में लोकसभा चुनाव में मिली हार का बदला लेने के लिए मैदान में है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के लिए यह उपचुनाव अग्निपरीक्षा से कम नहीं है, क्योंकि उन्हें प्रदेश की कमान संभाले कुछ ही महीने हुए हैं। इस चुनाव में हर एक वोट मायने रखता है, और सभी दलों के नेता इस प्रतिष्ठा की लड़ाई में अपनी पूरी ताकत लगा चुके हैं।

कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर

राजस्थान में विधानसभा उपचुनाव के सात सीटों पर लड़ाई दिलचस्प हो गई है। जहां एक ओर बीजेपी ने सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, वहीं कांग्रेस केवल अपनी ताकत पर ही मैदान में है। कांग्रेस, जो पहले लोकसभा चुनाव में गठबंधन कर चुनाव लड़ने वाली थी, अब अकेले इस उपचुनाव में भाग ले रही है। इसके अलावा, बीएपी और आरएलपी जैसे क्षेत्रीय दल भी कुछ सीटों पर मैदान में हैं, जो कांग्रेस और बीजेपी के लिए चुनौती पेश कर रहे हैं।

झुंझुनूं में कांग्रेस के लिए मुसीबत

झुंझुनूं सीट पर जहां कांग्रेस के लिए स्थिति मजबूत मानी जाती है, वहीं निर्दलीय उम्मीदवार राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने कांग्रेस के वोट बैंक में सेंधमारी करने की योजना बनाई है। गुढ़ा का मैदान में उतरना न सिर्फ कांग्रेस बल्कि बीजेपी के लिए भी परेशानी का सबब बन सकता है।

देवली-उनियारा में नरेश मीणा का प्रभाव

टोंक जिले की देवली-उनियारा सीट पर नरेश मीणा की निर्दलीय चुनौती कांग्रेस के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। मीणा ने क्षेत्र में अपना प्रभाव स्थापित किया है और उनका चुनावी प्रभाव इस सीट पर मतदाताओं को प्रभावित कर सकता है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए यह सीट चुनौतीपूर्ण बन गई है।

खींवसर और चौरासी में क्षेत्रीय दलों का दबाव

खींवसर और चौरासी सीट पर क्षेत्रीय दलों के उम्मीदवारों ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। खींवसर में कनिका बेनीवाल (आरएलपी) और चौरासी में अनिल कटारा (बीएपी) जैसे नए उम्मीदवारों ने बीजेपी और कांग्रेस के बीच की टक्कर को और कड़ा बना दिया है।

इस प्रकार, राजस्थान के उपचुनाव में कांग्रेस और बीजेपी के साथ-साथ निर्दलीय और क्षेत्रीय दल भी अपनी पूरी ताकत से मैदान में हैं।

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