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कुर्सी मिली... लेकिन 24 घंटे में छीन ली गई! 550 पार्षदों पर सरकार का गुप्त खेल... क्या है इसका राज़?

Sudden Political Shift: राजस्थान की राजनीति में एक बड़ा झटका तब लगा जब सरकार ने 78 नगरीय निकायों में 550 पार्षदों की नियुक्ति को महज 24 घंटे के भीतर (Sudden Political Shift)रद्द कर दिया। स्वायत्त शासन निदेशालय द्वारा 13 अक्टूबर...
07:12 PM Oct 14, 2024 IST | Rajesh Singhal

Sudden Political Shift: राजस्थान की राजनीति में एक बड़ा झटका तब लगा जब सरकार ने 78 नगरीय निकायों में 550 पार्षदों की नियुक्ति को महज 24 घंटे के भीतर (Sudden Political Shift)रद्द कर दिया। स्वायत्त शासन निदेशालय द्वारा 13 अक्टूबर को जारी किए गए आदेश को एक ही रात में वापस ले लिया गया। राजनीतिक गलियारों में यह खबर भूकंप की तरह फैल गई। बताया जा रहा है कि इस फैसले के पीछे बीजेपी के आंतरिक असंतोष और सत्ता में खींचतान का बड़ा हाथ है।

यू-टर्न ने मचाया सियासी भूचाल

सरकार का यह अप्रत्याशित फैसला राज्य में गहरी राजनीतिक उथल-पुथल का संकेत दे रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि इतने बड़े फैसले को इतनी जल्दी क्यों पलटा गया? सूत्रों की मानें तो पार्टी के कई स्थानीय नेताओं और बीजेपी पदाधिकारियों ने इन नियुक्तियों पर नाराजगी जताई थी, जिसके चलते सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा।

बीजेपी के पदाधिकारियों में असंतोष की चर्चा

सूत्रों के अनुसार, पार्टी के स्थानीय स्तर के पदाधिकारी इस नियुक्ति प्रक्रिया से नाखुश थे। विधानसभा क्षेत्रों में ब्लॉक और जिला अध्यक्षों के अलावा कई अन्य बीजेपी नेता इस नियुक्ति से संतुष्ट नहीं थे, जिसके चलते पार्टी के अंदर ही विरोध के स्वर उठने लगे। यह असंतोष पार्टी के भीतर अंदरूनी खींचतान की ओर इशारा कर रहा है, जो कि चुनावी साल में बीजेपी के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।

सत्ता पक्ष पर असमंजस का आरोप

राजनैतिक विश्लेषक मानते हैं कि सत्ता पक्ष की यह अनिश्चितता उनकी कमजोर पकड़ और आपसी संघर्ष की ओर इशारा करती है। सरकार ने कुछ ही घंटे पहले की गई नियुक्तियों को रद्द कर राजनीतिक दांवपेच का प्रदर्शन किया है, जो पार्टी की अंदरूनी स्थिति पर सवाल खड़े करता है।

क्या नए सिरे से होंगी नियुक्तियां?

सूत्रों का कहना है कि अब सरकार नए सिरे से एक्सरसाइज करने की योजना बना रही है। इसमें स्थानीय स्तर से सुझाव लेकर पार्षदों की नई सूची तैयार की जा सकती है, लेकिन इसमें कुछ वक्त लग सकता है। हालांकि, इस बीच विपक्ष इस फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे सरकार की नियोजन क्षमता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह मान रहा है।

क्या कहते हैं राजनैतिक जानकार?

राजनैतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के फैसलों से बीजेपी के आंतरिक संगठन में गहरे मतभेदों का संकेत मिलता है। चुनावी साल में ऐसे कदम पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।

 

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