• ftr-facebook
  • ftr-instagram
  • ftr-instagram
search-icon-img

Rajasthan: खींवसर में हनुमान बेनीवाल का दांव! क्या 'रानी' को जिताकर 'राजधानी' को बचा पाएंगे?"

Rajasthan By-Election 2024: राजस्थान के उपचुनावों में  (Rajasthan By-Election 2024)खींवसर सीट पर सियासी हलचलें तेज़ हो गई हैं, और इसकी वजह बनी हैं हनुमान बेनीवाल। इस बार उनकी पत्नी, कनिका बेनीवाल, चुनावी अखाड़े में हैं, जबकि हनुमान खुद नागौर से...
featured-img

Rajasthan By-Election 2024: राजस्थान के उपचुनावों में  (Rajasthan By-Election 2024)खींवसर सीट पर सियासी हलचलें तेज़ हो गई हैं, और इसकी वजह बनी हैं हनुमान बेनीवाल। इस बार उनकी पत्नी, कनिका बेनीवाल, चुनावी अखाड़े में हैं, जबकि हनुमान खुद नागौर से सांसद होने के नाते अपनी राजनीतिक जान बचाने के लिए जी-जान से जुटे हुए हैं।

खींवसर विधानसभा, जिसे ‘राज’ धानी माना जाता है, अब आरएलपी के लिए अस्तित्व की अंतिम कुंजी बन गई है। अगर हनुमान और कनिका इस सीट पर हार जाते हैं, तो पार्टी का राजस्थान विधानसभा से पूरी तरह सफाया हो जाएगा! इस डर ने हनुमान को चुनावी रणभूमि में पूरी ताकत झोंकने पर मजबूर कर दिया है। वे हर कदम पर अपने समर्थकों की भावनाओं को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि इस महत्वपूर्ण मुकाबले में जीत हासिल कर सकें और अपने राजनीतिक साम्राज्य को बचा सकें। क्या वे इस दांव में सफल होंगे, या खींवसर की हार उनके लिए राजनीतिक अस्तित्व का अंत बन जाएगी?

हनुमान बेनीवाल.. खींवसर सीट पर अस्तित्व की लड़ाई

राजस्थान के उपचुनावों में हनुमान बेनीवाल का नाम सुर्खियों में है, क्योंकि उनकी पत्नी कनिका बेनीवाल खींवसर सीट से चुनाव लड़ रही हैं। बेनीवाल, जो नागौर से सांसद हैं, इस सीट को अपनी पार्टी आरएलपी के अस्तित्व के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं। उनकी हालिया सभाओं में किए गए भावुक बयानों ने चुनावी माहौल को गरमाया है। उन्होंने कहा कि अगर वे इस बार चुनाव हार गए, तो आरएलपी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।

पुरानी मित्रता पर नए संघर्ष की छाया

इस उपचुनाव में हनुमान का सामना उनके पुराने साथी रेवंत राम डांगा से हो रहा है, जो अब भाजपा के प्रत्याशी के रूप में बेनीवाल के खिलाफ हैं। रेवंत राम डांगा का पिछले 20 साल से बेनीवाल के साथ रहना अब एक नए संघर्ष में तब्दील हो गया है। जाट वोट का प्रभाव खींवसर सीट पर निर्णायक साबित हो सकता है, जो बेनीवाल के लिए एक बड़ा चुनौती बन सकती है।

खींवसर... आरएलपी की राजधानी

खींवसर सीट को आरएलपी की राजधानी माना जाता है। बेनीवाल जानते हैं कि यदि वे यह सीट हार गए, तो उनकी पार्टी का भविष्य अधर में लटक जाएगा। वर्तमान में आरएलपी का एकमात्र सांसद होने के नाते, खींवसर की हार उनके दबंग व्यक्तित्व को चुनौती दे सकती है। इसलिए, उन्होंने अपनी पत्नी को चुनावी मैदान में उतारकर संदेश देने का प्रयास किया है कि उनका संबंध जनता से हमेशा बना रहेगा।

नामांकन सभा की जोरदार सफलता

25 अक्टूबर को आयोजित बेनीवाल की नामांकन सभा ने साबित कर दिया कि खींवसर सीट उनके लिए कितनी महत्वपूर्ण है। यह सभा पांच घंटे तक चली और इस दौरान उपस्थित लोगों की संख्या में कोई कमी नहीं आई। इस सभा में बेनीवाल के प्रति उपस्थित लोगों की सहानुभूति स्पष्ट रूप से नजर आई, जबकि उसी दिन भाजपा के बड़े नेताओं की सभा भी आयोजित हुई थी।

यह भी पढ़ें: Bharatpur: भरतपुर पुलिस-गौतस्करों में मुठभेड़ ! पुलिस की जवाबी कार्रवाई से घबराकर भागे तस्कर, गौवंश सुरक्षित

यह भी पढ़ें: Bhilwara: दीपावली की रौनक से पहले तीन बच्चों की मां ने लगाई फांसी.. आत्महत्या की वजह बनी रहस्य

.

tlbr_img1 होम tlbr_img2 शॉर्ट्स tlbr_img3 वेब स्टोरीज़ tlbr_img4 वीडियो