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Rajasthan: बेनीवाल का तीखा बयान!'वसुंधरा खुद का नाम पढ़ कर पर्ची खा जातीं'...भजनलाल के CM बनने पर क्या कहा!

Rajasthan By-Election 2024:राजस्थान के खींवसर में 13 नवंबर को होने वाले उपचुनाव की लड़ाई पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन चुकी है। खींवसर सीट से नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की पत्नी, कनिका बेनीवाल, मैदान में हैं और उनकी जीत-हार...
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Rajasthan By-Election 2024:राजस्थान के खींवसर में 13 नवंबर को होने वाले उपचुनाव की लड़ाई पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन चुकी है। खींवसर सीट से नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की पत्नी, कनिका बेनीवाल, मैदान में हैं और उनकी जीत-हार से बेनीवाल परिवार की प्रतिष्ठा सीधे तौर पर जुड़ी है। (Rajasthan By-Election 2024)अपने आक्रामक भाषणों और देसी अंदाज के लिए मशहूर हनुमान बेनीवाल इस चुनाव में अपनी पत्नी के प्रचार के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं, जिससे यह चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।

राजस्थान की सियासत में बेनीवाल की छवि एक जुझारू और आम जनता से जुड़ने वाले नेता की रही है। उनकी देसी शैली और तीखे तेवर सीधे जनता से कनेक्ट करते हैं, जो इस बार खींवसर में वोटों की दिशा को बदल सकते हैं।

मुख्यमंत्री की "पर्ची पॉलिटिक्स" पर बेनीवाल का तीखा वार

एक चुनावी सभा में हनुमान बेनीवाल ने भाजपा की मुख्यमंत्री नियुक्ति प्रक्रिया पर करारा कटाक्ष किया। बेनीवाल ने भजनलाल शर्मा को "पर्ची मुख्यमंत्री" कहकर तंज कसा, क्योंकि विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री पद के नाम का चयन एक पर्ची के जरिए किया गया था।

उन्होंने कहा कि अगर वसुंधरा राजे में साहस होता तो वे वह पर्ची खुद पढ़ लेतीं और जनता को खुद के नाम का ऐलान कर देतीं। यह बयान चुनावी गर्मी को और भी बढ़ा रहा है और भाजपा के सामने एक नया सियासी मुद्दा खड़ा कर रहा है।

47 साल पुरानी राजनीतिक विरासत का दांव

हनुमान बेनीवाल एक पुराने राजनीतिक परिवार से आते हैं, जिनकी विरासत 47 साल पुरानी है। उनके पिता, रामदेव बेनीवाल, 1977 में मुंडावा सीट से कांग्रेस के टिकट पर और फिर 1985 में लोकदल से विधायक बने।

2008 के परिसीमन के बाद, इस सीट का नाम खींवसर रखा गया, और हनुमान बेनीवाल ने भाजपा के चिन्ह पर जीत हासिल की। बेनीवाल परिवार की इस लंबी राजनीतिक विरासत के चलते खींवसर का चुनावी मुकाबला व्यक्तिगत और राजनीतिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बन चुका है।

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