• ftr-facebook
  • ftr-instagram
  • ftr-instagram
search-icon-img

Rajasthan By-Election: देवली-उनियारा में कांग्रेस-BJP में असली टक्कर! नरेश मीणा कितनी बड़ी चुनौती? पढ़ें पूरा गणित

Rajasthan By-Election2024 :राजस्थान के उपचुनाव में देवली-उनियारा विधानसभा (Rajasthan By-Election 2024)सीट ने सबका ध्यान खींचा है, इसे अब सबसे हॉट सीट माना जा रहा है। 2008 के परिसीमन के बाद से इस गुर्जर-मीणा बाहुल्य क्षेत्र में मतदाताओं ने हमेशा पार्टी...
featured-img

Rajasthan By-Election2024 :राजस्थान के उपचुनाव में देवली-उनियारा विधानसभा (Rajasthan By-Election 2024)सीट ने सबका ध्यान खींचा है, इसे अब सबसे हॉट सीट माना जा रहा है। 2008 के परिसीमन के बाद से इस गुर्जर-मीणा बाहुल्य क्षेत्र में मतदाताओं ने हमेशा पार्टी प्रत्याशियों को प्राथमिकता दी है, चाहे वह कांग्रेस हो या भाजपा।

निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रभाव यहां सीमित ही रहा है। अब इस बार कांग्रेस से बागी होकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरे नरेश मीणा, जो एक तेजतर्रार छात्र नेता रहे हैं, ने इस सीट पर नई दिलचस्पी पैदा कर दी है। हालांकि, उनके नामांकन के बाद भी सीट पर वोटिंग का प्रवाह पार्टी लाइन के अनुसार ही नजर आ रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नरेश मीणा अपनी पहचान बनाने में सफल हो पाएंगे या फिर परंपरा को तोड़ने में असफल रहेंगे।

देवली-उनियारा में भाजपा और कांग्रेस के बीच सटीक मुकाबला

देवली-उनियारा से भाजपा के पूर्व विधायक राजेंद्र गुर्जर को मैदान में उतारते हुए कांग्रेस ने स्थानीय उम्मीदवार कस्तूरचंद मीणा को अपनी ओर से चुनावी रण में उतारा है। दोनों ही प्रत्याशी अपने-अपने समाज से जुड़े हुए हैं, जो इस विधानसभा क्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि के बाद, कुल 13 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।

अंतिम दिन कांग्रेस के पूर्व नेता शकीलुर्रहमान और रामसिंह मीणा के अलावा केवट समाज आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष उमाशंकर कहार समेत कुल 11 प्रत्याशियों ने अपने नामांकन पत्र भरे। इसके बावजूद, स्थानीय मतदाताओं का झुकाव स्पष्ट रूप से कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवारों की ओर अधिक दिखाई दे रहा है। यह चुनाव न केवल मतदाताओं के लिए बल्कि दोनों प्रमुख पार्टियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण परीक्षा साबित होने वाला है।

देवली-उनियारा का जातिगत समीकरण

टोंक जिले की देवली-उनियारा में 1 लाख 55 हजार 954 पुरुष व 1 लाख 46 हजार 766 महिला समेत 3 लाख 2 हजार से ज्यादा मतदाता है। यहां सबसे ज्यादा 65 हजार से ज्यादा मतदाता एसटी (मीणा-भील व अन्य) के है। इसके बाद 60 हजार के करीब एससी (बैरवा, रैगर, कोली, वाल्मिकी, खटीक व अन्य) है। वही 55 हजार से ज्यादा हजार गुर्जर, करीब 15 हजार ब्राह्मण, 14 से ज्यादा जाट और करीब इतने ही (14 हजार) मुस्लिम, 12 हजार माली, 8 हजार वैश्य-महाजन और 4 हजार के लगभग राजपूत मतदाताओं के अलावा 56 हजार से ज्यादा अन्य जातियों के मतदाता है।

नरेश मीणा कितनी बड़ी चुनौती

कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय फार्म भरने के बाद नरेश मीणा ने भले ही देवली-उनियारा की सीट के सियासी रण को दिलचस्प बना दिया है। लेकिन राजनैतिक जानकर ही नही देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र के मतदाता भी उनकी जीत को नामुमकीन मान रहे है। क्योंकि मीणा-बाहुल्य इलाके वर्तमान सांसद हरीशचंद्र मीणा की समाज के वोटो में अच्छी पकड़ के साथ ही उनकी सियासी रणनीति के चलते ही वह यहां से दो विधायक बनने के साथ ही एक बार सांसद चुनाव में यहां से बड़ी बढ़त ले चुके है। भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र गुर्जर के देवधाम जोधपुरिया ट्रस्ट अध्यक्ष रह चुके है और यही से पूर्व विधायक भी रहे है। तो गुर्जर मतदाताओं के साथ ही मिलनसारिता के स्वभाव व भाजपा से जुड़े होने के कारण उनकी भी संभावनाए है।

कांग्रेस की जीत के लिए पायलट कितने जरुरी

देवली-उनियारा उपचुनाव में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट की भूमिका महत्वपूर्ण है। क्योंकि मीणा-गुर्जर बाहुल्य इलाके में जहां हरीश मीणा अपने समाज में पकड़ बनाए हुए है तो सचिन पायलट का गुर्जर समाज उनका दिवाना है।

पायलट के कहने पर अगर गुर्जर समाज ने राजेंद्र गुर्जर का साथ छाेड दिया तो कांग्रेस प्रत्याशी केसी मीणा आसान के जीत के साथ विधानसभा में पहुंच सकते है। वह यहां 2013 से 2018 के में विधायक रह चुके हैं। लेकिन 2014 में पीसीसी चीफ बनने व 2018 के विधानसभा चुनाव टोंक से लड़ने के कारण देवली-उनियारा सीट से वह पूर्व डीजीपी हरीशचंद्र मीणा को जिताने में कामयाब रहे थे।

दूसरो के भरोसे नरेश

अपने चीर-परिचीत अंदाज में नामांकन दाखिल करने बाद कांग्रेस की सभा में समर्थको के साथ घुसने की कोशिश के बाद जहां निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा का नाम लोगो की जुबान पर तो आ गया है लेकिन ईवीएम मशीन में उनके नाम के आगे का बटन कितने लोग दबाते यह तो भविष्य बताएगा।

लेकिन जैसा कि वह खूद कह चुके है कि हनुमान बेनीवाल, रविंद्र सिंह भाटी, राजकुमार रोत, चंद्रशेखर आजाद उनका होकर साथ दे और यहां से नरेश मीणा जीतकर नया इतिहास लिखेंगे। यही पर उनकी कमजोर कड़ी खुलकर सामने आ गई है। क्योंकि उनके तेज-तर्रार भाषणो में भी वह दूसरों के सहारे ही जीत का दावा है।

जीत का गुणा-भाग

जिले की देवली-उनियारा विधानसभा सीट पर नामांकन प्रक्रिया के बाद भाजपा-कांग्रेस व अन्य पार्टियों व उम्मीदवारों की राजनैतिक चौसर बिछ गई है। दीपावली के बाद यहां असर सियासी रणनीति शुरु होगी और 13 नवंबर को मतदान होंगे। हालांकि नामांकन करने वाले सभी प्रत्याशी अपनी-अपनी जीत को लेकर जोड़-भाग के समीकरणों में लगे हैं।

लगातार दो बार यहां से हार चुकी भाजपा को तीसरी हार से टालने के लिए इस बार उनकी जंग कांग्रेस के स्थानीय उम्मीदवार से है। जिसकी मांग यहां के लोग कई चुनाव से करते आ रहे है। वर्तमान सांसद हरीश मीणा लगातार दो बार इस सीट पर जीत हासिल कर अपना लोहा मनवा ही चुके हैं।

यह भी पढ़ें: Rajasthan By-Election 2024: सांसद हरीश मीणा ने कांग्रेस के राज खोले..राजस्थान उपचुनाव में करोड़ों के टिकट सौदे का किया खुलासा!

.

tlbr_img1 होम tlbr_img2 शॉर्ट्स tlbr_img3 वेब स्टोरीज़ tlbr_img4 वीडियो