Rajasthan: राजस्थान उपचुनाव का रोमांच! भजनलाल सरकार ने गिनाए अचीवमेंट्स, कांग्रेस का ‘सरप्राइज अटैक’!
Rajasthan By-Election 2024: राजस्थान में एक बार फिर चुनावी माहौल गरम हो गया है, जहां सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। इस बार भाजपा और कांग्रेस के अलावा क्षेत्रीय दलों जैसे RLP (राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी) और BAP (भारत आदिवासी पार्टी) भी मैदान में हैं। (Rajasthan By-Election 2024) ये दोनों दल स्थानीय मुद्दों पर चुनावी संघर्ष कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस और भाजपा प्रदेश सरकार के 10 महीने के कार्यकाल और केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों को चुनावी मुद्दा बना रही हैं। कांग्रेस जहां किसानों, युवाओं, महिलाओं के मुद्दों और राज्य की भजनलाल सरकार की विफलताओं पर हमला कर रही है, वहीं भाजपा अपनी सरकार की उपलब्धियों को प्रचारित कर मतदाताओं को लुभाने में लगी है। इस चुनावी रण में चारों ओर संघर्ष की गूंज सुनाई दे रही है, जहां हर पार्टी अपनी जीत के लिए पूरी ताकत लगा रही है।
ईआरसीपी और यमुना जल समझौता बने चुनावी हॉटस्पॉट
राजस्थान में उपचुनाव के बीच ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ईआरसीपी) और यमुना जल समझौता प्रमुख चुनावी मुद्दे बने हुए हैं। भाजपा इन समझौतों को ऐतिहासिक बताते हुए गर्व कर रही है, जबकि कांग्रेस का आरोप है कि इनसे राजस्थान के जल संसाधनों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इन विवादित मुद्दों के साथ-साथ जातीय समीकरण और स्थानीय मुद्दों का भी चुनाव परिणामों में अहम भूमिका निभाने की संभावना है।
रालोपा की स्थानीय मुद्दों पर सीधी वोट अपील
खींवसर सीट पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) के टिकट पर हनुमान बेनीवाल की पत्नी कनिका बेनीवाल मैदान में हैं। खींवसर परंपरागत रूप से हनुमान बेनीवाल की सीट रही है, और रालोपा इस बार किसान, नौजवान, और स्थानीय मुद्दों पर जोर देते हुए मतदाताओं से वोट मांग रही है। बेनीवाल के विरोधियों पर सीधा हमला करते हुए, पार्टी ने अपने समर्थकों को लामबंद करने की कोशिश की है।
जल, जंगल और जमीन: ‘बाप’ का प्रमुख चुनावी एजेंडा
भारतीय आदिवासी पार्टी (बाप) ने चौरासी और सलूंबर सीटों पर चुनाव लड़ते हुए जल, जंगल और जमीन के मुद्दों को अपने एजेंडे में प्राथमिकता दी है। स्थानीय समस्याओं के लिए भाजपा और कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए, बाप पार्टी ने आदिवासी हितों के संरक्षण की मांग को प्रमुखता से उठाया है। पार्टी ने अपने मतदाताओं के समर्थन में अलग भील प्रदेश की मांग का मुद्दा भी बार-बार उठाया है।
भाजपा सरकार की विफलताएं गिना रही कांग्रेस
कांग्रेस इस उपचुनाव में भाजपा सरकार के 10 महीने के कार्यकाल को "हर मोर्चे पर विफल" करार देते हुए जमकर आलोचना कर रही है। कांग्रेस के मुताबिक, भाजपा ने प्रदेश के किसानों, महिलाओं और युवाओं को धोखा दिया है। बिजली-पानी की किल्लत, किसानों को उचित मूल्य पर फसल की खरीद में कमी, और बेरोजगारों को अवसर न देने जैसे मुद्दे कांग्रेस के अभियान में केंद्र बिंदु बने हुए हैं। कांग्रेस का दावा है कि भाजपा के शासन में महिलाओं और दलितों पर अत्याचार के मामले बढ़े हैं, जिससे भाजपा सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाकर मतदाताओं को रिझा रही भाजपा
भाजपा अपने प्रचार में मोदी सरकार के दस साल की उपलब्धियों और भजनलाल सरकार के दस महीने के कार्यों का बखान कर रही है। पार्टी का कहना है कि राज्य में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर सख्त कार्रवाई की गई है। साथ ही, पूर्ववर्ती सरकार की गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करते हुए भाजपा ने कांग्रेस की आलोचना की है।
भजनलाल सरकार पर कांग्रेस का सीधा हमला
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भजनलाल सरकार पर सीधे तौर पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनावी वादों के जरिए समाज के हर वर्ग से झूठे वादे किए और सत्ता में आई, लेकिन अब हर मोर्चे पर नाकाम साबित हो रही है। किसानों को रबी की फसल के दौरान पर्याप्त बिजली नहीं मिलने और बाजरे की खरीद के वादे को निभाने में विफलता को कांग्रेस अपने हर प्रचार में प्रमुखता से उठा रही है।
"भाजपा की योजनाएं आमजन की भलाई के लिए"
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का कहना है कि भाजपा की सभी योजनाएं गरीबों, किसानों और समाज के जरूरतमंदों की भलाई के लिए हैं। चाहे हर घर शौचालय योजना हो, उज्जवला योजना के तहत गैस कनेक्शन हों, या किसान सम्मान निधि, भाजपा ने समाज के प्रत्येक वर्ग को सशक्त बनाने का काम किया है।
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