Rajasthan: राजस्थान उपचुनाव में दिग्गजों के परिजन! कौन-कौन कर रहे हैं चुनावी मैदान में मुकाबला?
Rajasthan By-Election 2024: राजस्थान में उपचुनाव (Rajasthan By-Election 2024: )की तैयारियां जोरशोर से चल रही हैं, और इस बार जनता के सामने कुल सात विधानसभा सीटें हैं, जहां नए प्रतिनिधियों का चुनाव होगा। चुनावी रणभूमि में गर्मी बढ़ रही है, खासकर जब कई प्रमुख राजनीतिक परिवारों के करीबी रिश्तेदार चुनावी मैदान में उतरे हैं। इस स्थिति ने कई स्थानीय कार्यकर्ताओं के मन में निराशा का भाव उत्पन्न कर दिया है, जो अपने दम पर चुनाव लड़ने की उम्मीद लगाए बैठे थे। आइए, एक नज़र डालते हैं उन बड़े नेताओं के परिवारों पर, जिनके सदस्य इस बार चुनावी दंगल में अपनी किस्मत आजमाने आए हैं।
दौसा सीट से किरोड़ी के भाई का उत्थान
दौसा विधानसभा सीट पर भाजपा ने किरोड़ी लाल मीणा के छोटे भाई जगमोहन मीणा को उम्मीदवार बनाया है। जगमोहन, जो कि राज्य के पूर्व मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के भाई हैं, ने टिकट पाने में अपने भाई की महत्वपूर्ण भूमिका का फायदा उठाया। इस परिवार की राजनीतिक गहराई को देखते हुए कार्यकर्ताओं में यह सवाल उठने लगा है कि क्या टिकट केवल परिवार तक ही सीमित रह गए हैं।
सलूंबर सीट पर शांता देवी का चुनावी प्रयास
उदयपुर की सलूंबर सीट पर भाजपा ने दिवंगत विधायक अमृतलाल मीणा की पत्नी शांता देवी को मैदान में उतारा है। जबकि शांता देवी का नाम इस चुनाव में उन्हें फिर से मौका देने के लिए रखा गया है, कार्यकर्ताओं में यह विचारधारा व्याप्त है कि उन्हें मौका नहीं मिला। यह कदम भाजपा के मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश दर्शाता है।
खींवसर में कनिका बेनीवाल की उम्मीदवारी
नागौर की खींवसर सीट पर आरएलपी ने कनिका बेनीवाल को टिकट दिया है। वे हनुमान बेनीवाल की पत्नी हैं, जो खुद इस सीट से चार बार विधायक रहे हैं। यह स्थिति बेनीवाल परिवार के प्रभाव को मजबूत करती है, जिससे कार्यकर्ताओं में परिवारवाद की चिंता बढ़ रही है।
अलवर से आर्यन खान की नई शुरुआत
अलवर की रामगढ़ सीट पर कांग्रेस ने दिवंगत विधायक जुबैर खान के बेटे आर्यन खान को उतारा है। यह कदम खान परिवार की राजनीतिक धरोहर को बनाए रखने का प्रयास है, और आर्यन के लिए यह एक नई शुरुआत हो सकती है।
झुंझुनू सीट पर ओला परिवार की तीसरी पीढ़ी
कांग्रेस ने झुंझुनू सीट पर पूर्व विधायक और सांसद बृजेंद्र ओला के बेटे अमित ओला को प्रत्याशी बनाया है। ओला परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि इस सीट पर मजबूत है, और पार्टी ने इस बार परिवार की तीसरी पीढ़ी को मौका दिया है।
यह भी पढ़ें: Rajasthan: खींवसर में हनुमान बेनीवाल का दांव! क्या 'रानी' को जिताकर 'राजधानी' को बचा पाएंगे?"