Rajasthan: वसुंधरा ने दी बधाई! साथ ही किया तीखा तंज- 'पीठ में छुरा घोंपने वाले होते हैं माहिर!
Rajasthan By-Election Result 2024: राजस्थान के सात विधानसभा उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने अप्रत्याशित रूप से पांच सीटों पर जीत दर्ज की, जिससे पार्टी और उसके नेतृत्व को सराहा जा रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की जोड़ी ने संगठन और सरकार के बीच बेहतरीन तालमेल बैठाकर विपक्ष को पराजित किया। इन परिणामों के बाद प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की सादगी और रणनीतिक सोच की सराहना हो रही है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सोशल मीडिया पर पार्टी की जीत की बधाई तो दी, लेकिन उनका झालावाड़ में दिया गया भाषण ज्यादा चर्चा का विषय बन गया। महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़ी चर्चा करते हुए वसुंधरा राजे ने कुछ ऐसी बातें कही, जिन पर राजनीति गरमाई हुई है।
वसुंधरा राजे के भाषण ने मचाई सियासी हलचल: क्या था इशारा?
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने हाल ही में झालावाड़ में आयोजित महाराणा प्रताप की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा बयान दिया, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी। मंच से बोलते हुए उन्होंने कहा, "महाराणा प्रताप के जीवन से हमें यह सीखने को मिलता है कि लोग पीठ में छुरा घोंपने में माहिर होते हैं।" हालांकि, राजे ने महाराणा प्रताप की वीरता और उनके जीवन के सिद्धांतों पर चर्चा करते हुए यह कहा, लेकिन उनके इस बयान को लेकर चर्चाएं गर्म हो गईं।
महाराणा प्रताप से प्रेरणा लेने की बात
वसुंधरा राजे ने अपने भाषण में महाराणा प्रताप के जीवन से प्रेरणा लेने की बात की। उन्होंने बताया कि महाराणा प्रताप निहत्थे पर वार करने के बजाय अपने साथ दो तलवारें रखते थे— एक अपने बचाव के लिए और दूसरी निहत्थे के लिए। राजे ने इस पर जोर दिया कि महाराणा के जीवन से हमें यह सिखना चाहिए कि समय का चक्र हमेशा बदलता रहता है, और जो लोग अत्यंत विकट परिस्थितियों में भी हार नहीं मानते, वे ही जीतते हैं।
राजे के इशारों में छिपा राजनीतिक संदेश
हालांकि, राजे ने अपने भाषण में महाराणा प्रताप की तारीफ की और उनके सिद्धांतों को साझा किया, लेकिन उनके शब्दों ने राजनीतिक सस्पेंस भी पैदा कर दिया। वसुंधरा राजे ने यह भी कहा कि "सांप से कितना ही प्रेम कर लो, वह अपने स्वभाव के अनुरूप कभी न कभी तो आप पर जहर उगलेगा ही।" इस बयान के बाद से यह चर्चा हो रही है कि क्या राजे का इशारा किसी विशेष नेता या पार्टी के भीतरघात की ओर था। उनके इस बयान ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या वह किसी सियासी प्रतिद्वंदी को लेकर यह बात कर रही हैं, या फिर अपनी ही पार्टी में हो रही गुटबाजी पर तंज कस रही हैं।
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