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Baran: शाहबाद का जंगल कटेगा या बचेगा? ऊर्जा मंत्री का ये कैसा जवाब, अपनी सरकार के वन महकमे पर उठाए सवाल!

Shahabad forest cutting: राजस्थान के बारां जिले के शाहबाद क्षेत्र में 400 हेक्टेयर घने जंगल का (Shahabad forest cutting) सफाया कर 1.19 लाख पेड़ों की बलि दी जाएगी, ताकि एनर्जी जेनरेशन के लिए पंप स्टोरेज प्लांट लगाया जा सके। यह...
09:09 PM Oct 17, 2024 IST | Arjun Arvind

Shahabad forest cutting: राजस्थान के बारां जिले के शाहबाद क्षेत्र में 400 हेक्टेयर घने जंगल का (Shahabad forest cutting) सफाया कर 1.19 लाख पेड़ों की बलि दी जाएगी, ताकि एनर्जी जेनरेशन के लिए पंप स्टोरेज प्लांट लगाया जा सके। यह चौंकाने वाला कदम जहां सरकार के विकास एजेंडे का हिस्सा है, वहीं पर्यावरण प्रेमियों और वन्यजीव संरक्षकों के लिए एक बड़े संकट की घंटी है। वे इस विनाशकारी योजना का कड़ा विरोध कर रहे हैं, और सरकार से अपील कर रहे हैं कि विकास के नाम पर इस हरे-भरे जंगल को उजाड़ने से बचाया जाए।

राजस्थान के बारां जिले के शाहबाद क्षेत्र में 400 हेक्टेयर जंगल की कटाई कर पंप स्टोरेज प्लांट लगाने की योजना पर विवाद खड़ा हो गया है। कोटा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब राजस्थान फर्स्ट ने ऊर्जा मंत्री हीरालाल नगर से इस मुद्दे पर सवाल किया, तो उन्होंने विकास की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यह परियोजना नियम और प्रक्रियाओं के तहत हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी को इस परियोजना से आपत्ति है, तो उसकी जांच की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई होगी।

वन विभाग पर मंत्री ने उठाए सवाल

ऊर्जा मंत्री ने पंप स्टोरेज प्लांट के लिए 400 हेक्टेयर जंगल की कटाई को स्वीकार किया, लेकिन साथ ही वन विभाग पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि वन विभाग पहले 60,000 हेक्टेयर में पेड़ों की कटाई कर किए गए कब्जों को हटाए, जिससे उनकी ही सरकार के वन विभाग पर सवाल उठ खड़े हुए हैं।

कूनो नेशनल पार्क से नजदीकी पर चिंता

जिस इलाके में पंप स्टोरेज प्लांट लगाया जाएगा, वह मध्य प्रदेश के श्योपुर कूनो चीता नेशनल पार्क के करीब स्थित है। यह इलाका भारतीय वन्यजीव कॉरिडोर प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने की संभावना में है, जिसमें राजस्थान, मध्य प्रदेश, और उत्तर प्रदेश के जंगलों को जोड़कर एक बड़ा कॉरिडोर बनाने की योजना है। हालांकि, ऊर्जा मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित प्लांट कॉरिडोर से 45 किलोमीटर दूर है, लेकिन पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि वन्यजीव कहीं भी आ-जा सकते हैं, और इससे उनका निवास स्थान प्रभावित हो सकता है।

जंगल की कटाई के खिलाफ विरोध

पर्यावरण प्रेमियों और वन्यजीव संरक्षकों ने विकास के नाम पर जंगल की कटाई का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने शाहबाद के जंगल को संरक्षित करने के लिए एक पोस्टकार्ड अभियान भी शुरू किया है। उनका कहना है कि जंगल की कटाई उनके लिए बर्दाश्त नहीं होगी, और वे हर स्तर पर इसका विरोध जारी रखेंगे।

 

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भविष्य की कार्रवाई पर सवाल

ऊर्जा मंत्री के बयानों से यह साफ होता है कि सरकार 400 हेक्टेयर जंगल की कटाई कर पंप स्टोरेज प्लांट लगाने के अपने फैसले पर अडिग है। अब देखना यह होगा कि पर्यावरण प्रेमियों और वन्यजीव संरक्षकों के विरोध के बीच यह परियोजना कैसे आगे बढ़ेगी, और क्या सरकार जंगल की कटाई रोकने के लिए कोई वैकल्पिक कदम उठाएगी।

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