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राजेंद्र राठौड़ और गोविंद सिंह डोटासरा की मुलाकात के क्या मायने हैं? जानें अंदर की बात!

Rajasthan leaders in Haryana Election: राजस्थान की सियासत में इस समय एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें भाजपा के वरिष्ठ नेता Rajendra Singh Rathore और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष Govind Singh Dotasra एक-दूसरे से मिलते हुए नजर आ रहे हैं। इस...
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Rajasthan leaders in Haryana Election: राजस्थान की सियासत में इस समय एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें भाजपा के वरिष्ठ नेता Rajendra Singh Rathore और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष Govind Singh Dotasra एक-दूसरे से मिलते हुए नजर आ रहे हैं। इस मुलाकात में दोनों नेताओं के चेहरे पर हंसी और खुशी साफ झलक रही है। डोटासरा हाथ जोड़े हुए राठौड़ से मिलते हैं और फिर दोनों नेता हाथ मिलाते हैं। यह घटना हरियाणा के हिसार में हुई है, जिसके बाद से जनता के बीच कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

क्या हुआ बातचीत में?

राजेंद्र राठौड़, जो कि हरियाणा चुनाव के लिए भाजपा के प्रवासी प्रभारी बने हुए हैं, वहां पार्टी का प्रचार प्रसार कर रहे हैं। वहीं, गोविंद सिंह डोटासरा को कांग्रेस ने हरियाणा चुनाव के लिए स्टार प्रचारक नियुक्त किया है।

डोटासरा ने अपनी चुनावी मुहिम की शुरुआत आज हिसार से की। दोनों नेता एक ही होटल में ठहरे हुए थे, जहां टकराने के बाद उन्होंने गर्मजोशी से मुलाकात की। इस दौरान, दोनों नेताओं ने हरियाणा के सियासी समीकरणों पर चर्चा की और कुछ हल्की-फुल्की बातें भी की। यह मुलाकात लगभग 5 मिनट तक चली, जिसके बाद दोनों नेता अपने-अपने काम पर निकल गए।

चुनावी मंजर में अदावत

लोकसभा चुनाव के दौरान, डोटासरा और राठौड़ के बीच की अदावत सुर्खियों में रही थी। डोटासरा ने राठौड़ को "सुपर फ्लॉप" करार दिया था और यह कहा था कि यदि वे चूरू का चुनाव हार जाते हैं, तो उनका राजनीतिक करियर खत्म हो जाएगा।

इसके जवाब में राठौड़ ने कहा था कि "डोटासरा की बात गधे की लात जैसी है," और यह भी कि डोटासरा के भाषण में उनकी चर्चा होती है, जिससे उन्हें प्रसिद्धि मिलती है। हालांकि, हाल के दिनों में जब से दोनों नेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, उन्होंने एक-दूसरे के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सियासी बयानबाजी में अब कुछ ठंडापन आ गया है।

क्या है भविष्य में संभावनाएं?

इस मुलाकात के बाद जनता और सियासी पंडित यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि क्या यह सुलह का संकेत है या फिर चुनावी राजनीति में आगे और भी चटपटी बातें होंगी। क्या राठौड़ और डोटासरा के बीच का यह हंसता-मुस्कराता पल आने वाले चुनावों में एक नई रणनीति का हिस्सा है? वक्त बताएगा!

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