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जूली के बयान से उठा बवंडर! गहलोत बोले- कलाकारों की कोई श्रेणी नहीं, कला की इज्जत होनी चाहिए

राजस्थान में आईफा अवॉर्ड्स को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार से इस आयोजन पर हुए खर्च का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की है।
10:51 AM Mar 15, 2025 IST | Rajesh Singhal

Ashok Gehlot : राजस्थान में आईफा अवॉर्ड्स को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार से इस आयोजन पर हुए खर्च का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली पहले ही यह सवाल उठा चुके हैं कि आईफा की फाइल "बुलेट ट्रेन" की तरह चली, अब सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह खर्च किस आधार पर और किस उद्देश्य से किया गया।(Ashok Gehlot ) गहलोत ने सवाल उठाते हुए कहा कि 100 करोड़ रुपये का निवेश जनता के पैसे से किया गया है, ऐसे में इसका ठोस और सार्थक परिणाम राज्य के पर्यटन और अर्थव्यवस्था पर दिखना चाहिए।

सरकारी फंडिंग...प्राथमिकताओं पर उठे सवाल

राज्य विधानसभा में विनियोग विधेयक पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि जब धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों, जैसे खाटू श्याम जी और गोविंद देव जी मंदिरों के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं कराया गया, तब आईफा अवॉर्ड्स के लिए 100 करोड़ रुपये पानी की तरह बहा दिए गए। उन्होंने इसे जनता के पैसे की बर्बादी बताते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए।

माधुरी दीक्षित पर बयान ने बढ़ाया विवाद

आईफा आयोजन को लेकर सवाल उठाते हुए टीकाराम जूली ने एक और विवादित बयान दे दिया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन को भव्य बताने की कोशिश की जा रही है, लेकिन हकीकत यह है कि इसमें सिर्फ शाहरुख खान जैसे चुनिंदा सितारे ही नजर आए, जबकि माधुरी दीक्षित अब "फर्स्ट ग्रेड" की अभिनेत्री नहीं रहीं। उनके इस बयान के बाद बवाल मच गया, और बीजेपी ने इसे कलाकारों का अपमान करार देते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।

 गहलोत को देना पड़ा स्पष्टीकरण

टीकाराम जूली के बयान को लेकर कांग्रेस चौतरफा घिर गई। बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाते हुए कहा कि कांग्रेस न केवल जनता के पैसों की बर्बादी कर रही है, बल्कि भारतीय सिनेमा के दिग्गज कलाकारों का भी अपमान कर रही है। विवाद बढ़ता देख अशोक गहलोत को खुद आगे आकर सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि कलाकारों का कोई दर्जा नहीं होता, हर कलाकार का सम्मान किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि आईफा पर हुआ भारी खर्च जनता के पैसे का है, और सरकार को इस पर पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए।

आईफा को लेकर राजनीति जारी...

आईफा अवॉर्ड्स को लेकर यह विवाद अब केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सरकार की नीतियों, खर्चों की पारदर्शिता और कला एवं कलाकारों के सम्मान से भी जुड़ गया है। एक तरफ कांग्रेस इस मुद्दे पर बैकफुट पर नजर आ रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी इसे एक बड़े राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। अशोक गहलोत की प्रतिक्रिया के बावजूद सवाल अभी भी बने हुए हैं कि क्या सरकार आईफा पर हुए खर्च को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करेगी या यह मामला सिर्फ राजनीतिक बहस तक ही सीमित रहेगा?

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