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कांग्रेस नेता निसार ने क्या कहा? 'दरगाह आग नहीं, तूफान है! अब पूरा देश हिलने वाला है!

Ajmer Dargah Sharif:  अजमेर दरगाह मंदिर दावा मामले में सियासत और आस्था का तूफान! देशभर में इस मुद्दे पर बहस थमने का नाम नहीं ले रही। हिन्दू-मुस्लिम आस्था, संविधान और धार्मिक अधिकारों को लेकर लगातार नए-नए बयान सामने आ रहे...
06:11 PM Dec 09, 2024 IST | Rajesh Singhal

Ajmer Dargah Sharif:  अजमेर दरगाह मंदिर दावा मामले में सियासत और आस्था का तूफान! देशभर में इस मुद्दे पर बहस थमने का नाम नहीं ले रही। हिन्दू-मुस्लिम आस्था, संविधान और धार्मिक अधिकारों को लेकर लगातार नए-नए बयान सामने आ रहे हैं। (Ajmer Dargah Sharif ) अब इस विवाद में कर्नाटक के तुमकुर सिटी से इंडियन मूवमेंट पार्टी के नेता निसार अहमद ने भी एंट्री मारते हुए एक विवादास्पद बयान दे दिया है, जो राजनीति के साथ-साथ धार्मिक माहौल को और गरमा सकता है। आइए, जानते हैं इस बयान के पीछे की पूरी कहानी और इसका राजनीतिक असर क्या हो सकता है।

दरगाह पर उठे सवालों पर कड़ी प्रतिक्रिया

इंडियन मूवमेंट पार्टी के नेता निसार अहमद ने अजमेर दरगाह को लेकर हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। निसार ने गुप्ता को 'नादान' बताते हुए कहा कि ख्वाजा साहब की दरगाह एक ऐतिहासिक और सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है, जिसे किसी भी तरह से विवादित करने का प्रयास करना गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ख्वाजा साहब का प्रभाव और आस्था पूरी दुनिया में फैली हुई है और उनके खिलाफ कोई भी नापाक प्रयास उल्टा साबित होगा।

कौमी एकता का प्रतीक

निसार अहमद ने ख्वाजा साहब की दरगाह को कौमी एकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह धार्मिक स्थल न केवल मुसलमानों के लिए, बल्कि समस्त भारतीय समाज के लिए आस्था का केंद्र है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और विष्णु गुप्ता जैसे नादान लोगों को रोकना चाहिए, जो बिना सोचे-समझे ऐसे विवाद खड़े कर रहे हैं। निसार का यह बयान यह दर्शाता है कि अजमेर दरगाह का महत्व केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यह भारतीयता और एकता का एक अभिन्न हिस्सा है।

आस्था और इतिहास का संगम

निसार अहमद ने यह भी कहा कि अजमेर दरगाह वह स्थल है, जहां देश के कई ऐतिहासिक हस्तियों, राजा, रजवाड़ा, मुग़ल बादशाहों और मराठों ने मत्था टेका और ख्वाजा साहब से आशीर्वाद लिया। यह दरगाह सदियों से एकता, शांति और भाईचारे का प्रतीक रही है, और किसी को भी इसे विवादित करने का अधिकार नहीं है।

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