Tirupati Laddu Controversy: तिरुपति लड्डू विवाद के दौरान मंदिर में हुआ धार्मिक शुद्धिकरण अनुष्ठान
Tirupati Laddu Controversy: तिरुमाला के श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में सोमवार को एक विशेष "शांति हवन" का आयोजन किया गया, जिसमें चार घंटे तक पञ्चगव्य प्रक्षालन किया गया। यह अनुष्ठान सुबह 6 बजे से 10 बजे तक चला और इसका उद्देश्य मंदिर को दोबारा से शुद्ध करना था। क्योंकि हाल ही में खुलासा किया गया कि मंदिर का प्रसाद बनाने में जानवर की चर्बी का इस्तेमाल किया गया था।
मंदिर का शुद्धिकरण
तिरुपति तिरुमला देवस्थानम (TTD) के कार्यकारी अधिकारी जे. श्यामला राव ने बताया कि यह अनुष्ठान उन कथित अपवित्र प्रथाएं को दूर करने के लिए किया गया था, जो कि जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली YSRCP सरकार के दौरान हुए थे। राव ने कहा कि इस अनुष्ठान का उद्देश्य लड्डू प्रसाद की पवित्रता को पुनर्स्थापित करना और श्रीवायरि भक्तों की भलाई सुनिश्चित करना है।
क्या है अपवित्र प्रसाद का विवाद?
19 सितंबर को, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया था कि तिरुपति लड्डू के प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी में जानवर की चर्बी मिलाया गया। इसके बाद TTD ने विभिन्न सैम्पल्स की लैब टेस्ट करवाई,जिसमें जानवर की चर्बी की उपस्थिति पाई गई। अब TTD ने उस ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है जिसने 'असली' घी की जगह 'मिलावट' वाला घी इस्तेमाल में लिया। इस पूरे विवाद ने मंदिर के प्रसाद की पवित्रता पर गंभीर सवाल उठाए हैं और भक्तों को बेचैन कर दिया है।
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