Indian Tank Zoravar Testing: जैसलमेर में दिखा भारत के लाइट टैंक 'जोरावर' का जोर, सफल परीक्षण पर रक्षा मंत्री ने दी बधाई
Indian Tank Zoravar Testing: (आसकरण सिंह) भारत में बने लाइट टैंक जोरावर का जैसलमेर के रेगिस्तानी इलाकों में परीक्षण किया गया। वजन में बेहद हल्का यह भारतीय टैंक जोरावर (Indian Tank Zoravar Testing) कई परीक्षणों के बाद साल 2027 तक भारतीय सेना में शामिल होगा। टैंक जोरावर के सफल परीक्षण पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी बधाई दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय लाइट टैंक जोरावर भारत के आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
भारतीय टैंक जोरावर का सफल परीक्षण
भारत के लाइट टैंक जोरावर का राजस्थान के जैसलमेर के रेगिस्तानी इलाकों में फील्ड टेस्ट किया। शुक्रवार को हुए फील्ड टेस्ट के दौरान इस लाइट टैंक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी टारगेट को पूरा किया। शुरुआती चरण में टैंक के फायरिंग प्रदर्शन का कड़ाई से मूल्यांकन किया गया। जिसमें यह पूरी तरह खरा उतरा। जोरावर टैंक ने दिए गए लक्ष्यों पर सटीकता से निशाना साधा। जिससे जाहिर होता है कि भारत का यह लाइट टैंक अद्भुत क्षमता के साथ अपने लक्ष्य को भेदने में पूरी तरह सक्षम है।
रक्षा मंत्री राजनाथ ने सफल परीक्षण पर दी बधाई
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी भारतीय टैंक जोरावर की जैसलमेर में सफल टेस्टिंग पर बधाई दी है। राजनाथ सिंह ने परीक्षण सफल रहने पर DRDO, भारतीय सेना और सभी एसोसिएट पार्टनर्स की सराहना की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि को डिफेंस सिस्टम और टेक्नोलॉजी में भारत की आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष डॉ. समीर वी कामत ने भी इस प्रोजेक्ट में शामिल पूरी टीम को बधाई दी।
25 टन का लाइट टैंक आसानी से चढ़ जाता है पहाड़
भारतीय टैंक जोरावर को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की इकाई लड़ाकू वाहन अनुसंधान- विकास प्रतिष्ठान (CVRDE) ने लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड (L&T) के सहयोग से विकसित किया है। 25 टन वजनी लाइट टैंक जोरावर को डिजाइन करने और इसका पहला प्रोटोटाइप बनाने में ढाई साल से भी कम समय लगा। परीक्षणों के बाद साल 2027 तक भारतीय सेना में शामिल किया जा सकता है। यह वजन में बाकी टैंक के मुकाबले काफी हल्का है। जो पहाड़ों पर आसानी से चढ़ सकता है, ऐसे में इसे ऊंचाई वाले सीमा क्षेत्रों में तैनात करने के लिए डिजाइन किया गया है।
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