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Urban Voter Apathy: अर्बन वोटर एपेथि क्या है? इसी के चलते मतदान से विमुख हो रहे हैं शहरी लोग?

05:17 PM May 03, 2024 IST | Bodhyani Sharma

Urban Voter Apathy: पूरे देश में लोकसभा चुनाव 2024 (Loksabha Election 2024)के मतदान की प्रक्रिया चल रही है। लोकसभा चुनाव के दो चरणों का मतदान क्रमशः 19 अप्रैल और 26 अप्रैल को पूरा भी हो चुका है, परंतु इन दोनों चरणों की वोटिंग प्रतिशत (Urban Voter Apathy) को देखा जाए तो ये समझ आता है कि मतदान पिछले चुनावों से कम हुआ है। मतदान प्रतिशत बढ़ाने की सारी कोशिशें राजनीतिक दलों के साथ साथ चुनाव आयोग भी कर रहा है, लेकिन मतदान को लेकर जनता में आई उदासीनता की वजह जानना भी जरूरी है।

क्यों है मतदाताओं के बीच मतदान को लेकर उदासीनता

देश भर में मतदान कम होने को लेकर चुनाव आयोग तो चिंतित दिखा ही साथ ही इसकी चिंता हर उस इंसान को होनी चाहिए जो लोकतंत्र में यकीन रखता है। एक चिंता का विषय ये भी है कि मतदान को लेकर उदासीनता बड़े शहरों में ज्यादा (Urban Voter Apathy) देखने को मिल रही है। मतदान करने को लेकर घरों से बाहर न जाकर छुट्टी मनाने या किसी अन्य काम में ज्यादा रुचि दिखाते हैं। इसे अर्बन वोटर एपेथि का नाम दिया गया है, अर्बन वोटर एपेथि यानि शहरी मतदाताओं की उदासीनता।

क्या कहते हैं आंकड़े और विशेषज्ञ

शहरी जनता की मतदान को लेकर उदासीनता के आंकड़ों की बात की जाए तो भारतीय चुनाव आयोग  2019 के लोकसभा चुनाव के मतदान के आंकड़ों को देखने से पता चलता है कि 55 प्रतिशत से भी कम मतदान वाली लोकसभा (Urban Voter Apathy) सीटों में बड़े शहरों के नाम शामिल हैं। ये वो शहर हैं जहां पढे - लिखे लोग सभी सुविधाओं के साथ अपना जीवन आराम से जी रहे हैं। पुणे, मुंबई, हैदराबाद, प्रयागराज, कानपुर, नागपूर, लखनऊ जैसे बड़े शहर इसी 55 फीसदी से कम मतदान की श्रेणी में आने वाले शहर हैं।

बड़े शहरों में बसे ज़्यादातर लोगों का वोटर लिस्ट में नाम ही नहीं...

एक पहलू इसमें ये भी दिखाई देता है कि बड़े शहरों की आबादी में अधिकतर लोग दूसरे शहरों या प्रदेशों से आकार काम - काज में बसे वो लोग हैं जो स्थानीय मतदाता ही नहीं है। उदाहरण के तौर पर देखा जाए तो बैंगलोर आईटी हब है, यहां काम और नौकरी के लिए आए दूसरे शहरों और प्रदेशों के लोग बहुत हैं। ऐसा ही आंकड़ा पढ़ने वाले छात्रों के लिए भी शामिल किया जा सकता है जो बड़े शहरों में अपनी बधाई के चलते जाकर बस तो जाते हैं परंतु वोटर वहां के नहीं होते हैं।

पहली बार मतदान करने वालों का ये आंकड़ा चौंकने वाला

बिहार, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में नए मतदाताओं की गिनती अगर देखि जाए तो बहुत अधिक हैं, परंतु मतदान के लिए पंजीकरण करने को लेकर जागरूकता न के बराबर देखने को मिल रही है। लोकसभा चुनाव 2024 में बिहार में 54 लाख से अधिक का आंकड़ा (Urban Voter Apathy) नए मतदाताओं का माना गया था, जबकि पंजीकरण करवाने वाले नए मतदाताओं की संख्या महज़ 9.3 लाख ही है। मतदान के लिए योग्य होने के बावजूद पंजीकरण करवाने में बिहार और उत्तर प्रदेश काफी पीछे है। कुछ राज्यों में इसके विपरीत परिणाम भी देखने को मिले जहां पर नए मतदाताओं में मतदान को लेकर जोश नज़र आया।

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